अखिलेन्द्र राज
आवाम की आवाज को कैसे दबाया जा रहा है
चंद टुकड़ो के लिये, गुण गान गाया जा रहा है
दीखनी चहिये जहा हालात हिंदुस्तान की
देखिये साहब वहाँ क्या क्या दिखाया जा रहा है
चंद टुकड़ो के लिये, गुण गान गाया जा रहा है
दीखनी चहिये जहा हालात हिंदुस्तान की
देखिये साहब वहाँ क्या क्या दिखाया जा रहा है
भुखमरी बेरोजगारी खेत मे मरता किसान
छोड़िये महलों को आकर देखिये हिंदोस्तान
छोड़िये महलों को आकर देखिये हिंदोस्तान
आइये फिर देखिये हालात उस इंसान का
लोग कहते है जिसे भगवान हिंदुस्तान का
लोग कहते है जिसे भगवान हिंदुस्तान का
जो ब्यवस्था कर रहा है शहर के पकवान का
सूखी रोटी से है लगता भोग उस भगवान का
सूखी रोटी से है लगता भोग उस भगवान का
सेठ साहूकार की फटकार जिसकी जिंदगी है
और उसका पूर्ण जीवन उन पगों की बंदगी है
और उसका पूर्ण जीवन उन पगों की बंदगी है
बेटियाँ होती जवां इसकी भी उसको फिक्र है
इस खबर की सिर्फ और बस सिर्फ उसको जिक्र है
इस खबर की सिर्फ और बस सिर्फ उसको जिक्र है
इस खबर को कोई भी अखबार लायेगा नही
और न ही किसी चैनल पर ये छायेगा कही
और न ही किसी चैनल पर ये छायेगा कही
क्योकि इस खबर मे कोई मसाला नही है
और इस पे कोई खास टीआरपी मिलने वाला नही है
और इस पे कोई खास टीआरपी मिलने वाला नही है
इसकी खबर सिर्फ उस इंसान के दिमाग पर चलती है
जिसमे हिंदुस्तान की असली तस्वीर पलती है
जिसमे हिंदुस्तान की असली तस्वीर पलती है
यह एक छोटी सी खबर है
जिस से टी.बी. और अखबार दोनो बेखबर है
जिस से टी.बी. और अखबार दोनो बेखबर है
यह कोई खास खबर नही पल रही है ,
ऐसी बहुत सी खबरे हिंदुस्तान मे चल रही है,
लेकिन उनपे कोई खास टीआरपी मिलने वाला नही है,
ऐसी बहुत सी खबरे हिंदुस्तान मे चल रही है,
लेकिन उनपे कोई खास टीआरपी मिलने वाला नही है,
इसलिये पत्रों और अखबारों मे ये चलने वाला नही है ,
मै ठहरा कवि मैने सोचा अभी
जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुचे कवि
इस बात को चरितार्थ किया जाये
और देश के यथार्थ को यथार्थ किया जाये
जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुचे कवि
इस बात को चरितार्थ किया जाये
और देश के यथार्थ को यथार्थ किया जाये
शायद किसी महासय के दिमाग मे मेरी बात पल जाये
और एक दिन टी.बी. और अखबारों मे टीआरपी खबरों की जगह
देश की असली तस्वीर चल जाये
और एक दिन टी.बी. और अखबारों मे टीआरपी खबरों की जगह
देश की असली तस्वीर चल जाये
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