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सुधीर की बेटी


जय जेतवानी 




कोई तीव गति से पीछे देखते हुए भाग रहा था। तभी एक शख्स ने उसको पकड़ा और उसे गोद में लिटा दिया तभी गोद में लेटे हुए हंसते हुए अनीता ने कहा "हमारी शादी को कितना टाइम हो गया है सुधीर?  लेकिन तुम अभी भी नहीं बदले, तुम अभी भी समय के रहते कब बच्चे बन जाते हो पता ही नहीं चलता है। जनाब, अब तो आप एक बच्चे के पिता बनने वाले हैं। अब तो सुधर जाइए"
यह बात सुनने के बात सुधीर ने अनीता को नीचे उतारा और और शांति से आगे बढ़ जाता है। अनीता भी चुपचाप उनके साथ चलना शुरू कर दिया। अभी कुछ देर सोचने के बाद सुधीर अपनी नजरों को अनीता की तरफ करते हुए कहने ही जा रहा होता है कि इतने में अनीता सुधीर के पास आकर  कहती है "जी कहिए।"
अनीता को देखते हुए सुधीर हंसता हुए कहता है " मैं लाचार काम की तलाश में 20 या 22 वर्षीय साल का लड़का छोटे से गांव से शहर आया और एक शहरी लड़की को यह गांव वाला पसंद आया। उसने उसको रहने को घर दिया और जिंदगी कितने साल मेरे साथ मेरा हमसफ़र बन कर जिए और मेरी काम को बढ़ाने के लिए और मेरी कला को दुनिया को दिखाने के लिए मैं सब कुछ दाव पर लगा दिया और आज जो भी हूं, सब तुम्हारी वजह से हूं।"
सुधीर ने फिर ख्यालों में इस कदर खो गया फिर  उसकी वह चेहरे की मुस्कुराहट न जाने कहां गुम हो गई।
सुधीर ने कहा  "आज हम गांव जा रहे हैं ताऊ जी और ताईजी से मिलने।"
यह सुन अनीता ने कहा "अच्छा यह तो अच्छी खबर हैं, इस पर तुम इतना कियू सोच रहे हो?"
इस पर सुधीर ने कोई उत्तर नहीं दिया वो बस शून्य में ताकता रहा, गाँव पहुँचने के बाद जैसे ही सुधीर और अनिता जैसे ही ताऊजी और ताईजी के घर गए तो
गुस्से में कोई सांसों के फुकारे हुआ और जोर से अपने पांव को जमी पर  पटकते हुए एक तेज कंपन पैदा करते हुए किसी के पैरों की आवाज जोर शोर से आ रही थी। तभी सुधीर ने पीछे से ताऊजी को आवाज़ लगाई "ताऊ जी शांत हो जाइए और क्या फर्क पड़ता है कि मुझे बेटी पैदा हुईं हैं?"
फिर अचानक से कुछ देर के लिए वह तेज कदमों की आहट रुक गई  और फिर से माहौल सन्नाटे दार हो गया। फिर वह कदमो की आवाज एक दिशा की तरफ तेजी से आते हुए सुनाई पड़ती है और फिर ताऊ जी ने तेजी से आते हुए अपनी एक हाथ की भुजा को ऊपर कर अपनी अंगुलियों को खोलकर किसी का गला हाथों में लेकर उसका गला दबाते हुए कहा
"सुधीर तू बिटवा रह गया तू हमार ,वरना तोहार के कटवा के फिकवा देत रहे , आज तू इतना बड़ा हो गया का कि तुम्हार जबान हमार सामन चलन लगी।"
तभी ताई जी दौड़ती हुई आई और कहां
"क्या कर रहे हो? यह हमार लल्ला है और आखिर तोहरा बचवा हैं।"
यह सुनने के बाद ताऊ जी के आंखों से आंसू आ गए और उन्होंने आंसू पोछते हुए कहा
"अरे हमको भी पता है कि हमार बेटवा हैं और भला कौन चाहेगा अपने बेटवा के मारण वास्ते, लेकिन तोहार बेटवा के समझा दे।"
सुधीर को नीचे गिरा हुआ देखकर अनीता भागती हुई आई और कहां
"सुधीर यह सब क्या है  और क्या हुआ ताऊ जी इतना  नाराज क्यों हैं तुमसे?"
सुधीर गुस्से में खड़ा हुआ और ताई जी सामने खड़ी थी को देखते हुए कहा
"मैं शहर से अपना सारा काम छोड़ छाड़ के आप से और ताऊ जी से मिलने आया था। इसलिए क्योंकि बचपन से ही मेरे माता पिता का निधन हो गया था आप दोनों ने मुझे मां बाप की तरह पाला और वह तो मुझसे पहले से ही नाराज थे क्योंकि मैंने पारिवारिक व्यापार में ना जाकर शहर में जाकर एक नौकरी करने के लिए शहर जो चला गया था। बिना उनके अनुमति के, हर रोज मुझे इस बात का अफसोस होता था कि आखिर मैंने जो भी किया गलत किया तो क्या जो वह कर रहे हैं वह सब सही है। अब वह चाहते हैं कि इस घर में हमको सिर्फ बेटा चाहिए बेटी नहीं। माफ करना! मुझे तो बेटी ही चाहिए।"
इतना कहते हुए सुधीर गुस्से में वहां से निकल जाता है उसे गुस्से में निकलते हुए देखकर ताई जी ने अनीता को भी उसके साथ जाने की तरफ इशारा कर दिया
आखिरकार सुधीर और अनीता को बेटी ही हुई इस कारण ताऊ जी ने एक ही छत के नीचे होने के बावजूद फिर भी करीबन 5 साल तक सुधीर से एक लफ्ज़ तक नहीं कहा और दूसरी तरफ सुधीर भी ताऊजी से नाराज था तो उसने भी इन सालों में कभी भी ताऊ जी से कभी बात नहीं करी, एक दिन सुधीर और अनीता और उनकी 5 साल की बेटी पूनम उन्हीं के साथ सो रही थी। सुधीर कुछ गहरा सोच रहा था इसलिए आधी रात होने के बावजूद भी उसकी आंखें नींद से भरी हुई थी लेकिन वह सो नहीं रहा था अचानक से अजीबोगरीब आवाज सुनकर सुधीर की आंख खुल गई। उसे किसी की मौजूदगी का अहसास हो गया था।ल ेकिन वह उठा नहीं लेकिन वह आहट धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी। उसने जल्दी से कमरे की बत्ती जलाई परंतु जो भी था उस कमरे में वह वहां से भाग चुका था। सुधीर ने इतना सब कुछ होने के बावजूद अनीता को उठाया और अनीता की नींद टूटने पर अनीता ने सुधीर को इतना परेशान देखते हुए अचंभित होते हुए सुधीर से पूछा
" क्या हुआ सुधीर सब कुछ ठीक तो है ना।"
सुधीर ने अनीता से धीमी आवाज में कहा
"हम अभी के अभी यहां से निकल रहे हैं?"
सुधीर की यह बात सुनते हुए अनीता ने उससे पूछा "आखिर हुआ क्या है?"
सुधीर ने चारों तरफ नजर घुमाते हुए कहा
" अनीता... कुछ मत पूछो, तुम्हें मेरी कसम। जैसा मैं कह रहा हूं वैसा करो। हम अभी के अभी यहां से निकल रहे हैं। बिना किसी को बताए।"
कसम देने की बात मानो अनीता के मन में चल रहे  लाखों सवालों को अनीता ने विराम दे दिया।
आधी रात में बिना किसी को बताए वह दोनों और उनकी बच्ची को लेकर वापस शहर लौट आए। सुधीर ने शहर आकर अनीता को बताया कि उसने क्यों आधी रात में वह गांव छोड़ने की बात क्यों कही। लेकिन गांव को छोड़ने पर सुधीर परेशान और उदास ही रहता था। एक दिन सुधीर को उदास देखते हुए अनीता ने कहा
"कब तक हम ताऊजी से नाराज रहेंगे?"
यह सब सुनने के बाद सुधीर ने कहा
"मुझे भी नहीं मालूम कब तक मैं ताऊ जी  से उदास रहूंगा।न जाने क्यों उन्हें हमसे बेटा चाहिए, बेटी नहीं। इस पूरे  परिवार में ताऊ जी ने उन सभी से नाता तोड़ दिया जिन्हें  बेटी होने वाली थी और मेरे लिए वह सब कुछ है। लेकिन अब मैं पिता बनने वाला हूं।अब मेरे लिए सब कुछ तुम और हमारी बेटी ही हो।उस रात उस कमरे में और कोई नहीं ताऊजी ही आए थे जरूर हमारी बच्ची को मारने के लिए।"
इतना कहने के बाद सुधीर की आंखें भर गई और आंसू गिरने लग गए।शहर की कामकाजी ढंग में आखिरकार सुधीर अपनी सभी पिछली बातों को भूल गया। एक दिन अचानक से जब सुधीर अपने घर के आंगन के बाहर अखबार पढ़ रहा था तो जैसे ही उसने अपनी आंखों को अखबार से हटाकर देखा तो ताइजी हड़बड़ाहट में रोती हुई उसके पास आ रही है। सुधीर ने ने अपना अखबार को साइड में रखा और अचंभित होते हुए ताई जी के पैर छूते हुए कहा :-"ताई जी आप यहां पर परंतु आपको यहां का पता किसने दिया और आप इतना दूर गांव से शहर कैसे आए?"
ताई जी नहीं अपने आंसू पोछते हुए सुधीर को देखते हुए कहा :-"बेटा तेरी याद और तेरी तन्हाई मुझे गांव से शहर ले आई, तू नहीं जानता है कितने दिनों से तेरी खोज खबर ढूंढने के लिए कितना परेशान हो गई थी मैं?"
ताई जी को परेशान होता देखकर सुधीर की आंखों से भी आंसू आ गए और उसे रोते हुए कहा "ताई जी मैं गांव नहीं आऊंगा।"
ताई जी ने सुधीर की बात सुनते हुए सुधीर के सर पर हाथ रखते हुए कहा :-"मैं सब जानती हूं कि तेरा क्या कारण है तू क्यों गांव नहीं आना चाहता है। लेकिन तेरे ताऊ जी की तबीयत बहुत खराब है। वह अभी अस्पताल में है। जाकर उनसे मिल लेना, बेटा!"
सुधीर ने जब यह बात सुनी तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने हकलाते हुए कहा :-"ता.. ता.. ताऊ जी! अस्पताल में है। मैं आज के आज अस्पताल जा रहा हूं, उनसे मिलने के लिए।"
सुधीर ने ताई जी को देखते हुए कहा :-"आप अंदर आइए कुछ खा पी लीजिए "
ताई जी ने सुधीर की बात सुनते हुए कहा :-"नहीं बेटा! मैं यहां सिर्फ तेरे लिए ही आई थी। तू बस उनसे मिल तुम गांव पहुंचोगे। उससे पहले मैं तुम्हें गांव में मिल जाऊंगी, अभी मैं चलती हूं।"
इतना कहते हुए ताईजी चली गई
सुधीर ने ताई जी की सारी बात सुनने के बाद  घर में वापस जाते हुए अनीता को आवाज़ लगाई और सामान को देते हुए जैसे से ही रवाना हो रहा था। तभी अचानक से उनकी फोन की घंटी बजी और सुधीर ने बिना वक्त गवांए  फोन उठाया और कहा "हेलो! कौन बोल रहा है? मैं अभी हड़बड़ी में हूं मैं आपसे बात मत करता हूं।"
इतना कहते हुए सुधीर  फोन रख ही रहा था कि फोन में से आवाज आई
" भैया! हम गांव से बोल रहे हैं ,ताऊ जी की तबीयत बहुत दिनों से खराब थी और उनको अभी अस्पताल में भर्ती कराया है, और आप भी अस्पताल आ जाइए वह आपको बहुत याद कर रहे हैं।"
सुधीर ने यह  सुनते हुए कहा कि "हां! हां!! मैं  अस्पताल आ रहा हूं।"
कुछ देर में अस्पताल पहुंचने के बाद जब ताऊ जी ने सुधीर को  जब देखा तो उनकी आंखों से आंसू टपकने लगे, सुधीर उनके पास में बैठ गया और उनकी हाथ को अपने हाथों में पकड़ते हुए कहा
"ताऊ जी! आपका बटुआ आ गया है,अब आपको कुछ नहीं हो सकता है।"
ताऊ जी ने बिस्तर पर लेटे लेटे अपनी तिरछी आंखें करते हुए सुधीर से पूछा :-"मुन्नी किधर है?"
सुधीर ने अपनी 5 साल की बेटी पूनम को उनके सामने बिठा दिया ताऊ जी ने पूनम के ऊपर अपना हाथ रखते हुए कहा
"हम भी कितना बड़ा पागल था जो इतने सालों से  तोहार से बात नहीं की, सुधीर बिटवा हमको लड़का लड़की में कोनो भेदभाव नहीं है। बस दरअसल हमारी बेटी शहर में जाने का जिद किया और वह फिर वापस कभी नहीं आई। इसलिए कोनो का बेटी देखने के बाद हमको हमारे बेटी याद आता है। सबसे  बुरी बात तोरी ताईजी बीमार हो चुकी थी और वह इस दुनिया में नहीं रही, उसको गुजरे  काफी वकत हो गया और तुझे भी ना पाकर हम टूट चुका था।अब तू वापस आ जा हमरे पास।"
सुधीर ने ताऊ जी की बात सुनते हुए हैरानी जताते हुए और रोते हुए पूछा :-"क्या! ताई जी नहीं रही?"
सुधीर अभी भी हैरान था क्योंकि ताई जी ने ही सुधीर को यह बताया था कि ताऊ जी की तबीयत खराब है और वह अस्पताल में हैं।

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