कुमार किशन कीर्ति
ईश्वर की अंश होती हैं माँ
बच्चों के लिए कितना कष्ट सहती हैं माँ
उसके नयन खुद भीग जाते हैं
जब बच्चों को रोते देखती हैं माँ
मुझे नहीं पता ईश्वर कैसे होते हैं,
लेकिन मेरी माँ तेरी शक्ल जब देखता हूँ
तब लगता हैं ईश्वर ऐसे होते हैं
माँ की चरणों की वंदना
तो विधाता भी करते हैं
इसके बिना तो संसार ही सुना लगता है
माँ की आँचल में जो सुख है
वो स्वर्ग में कहाँ से मिल पाएगा?
माँ की एक आशीष हमें
दुर्गुणों से दूर कर जाएगा
माँ का प्रेम निश्छल है, कोलम है, पवित्र है
इसके कर्जो को हम चुका पाए
हम में वो सामर्थ कहाँ?
ईश्वर की अंश होती हैं माँ
बच्चों के लिए कितना कष्ट सहती हैं माँ
उसके नयन खुद भीग जाते हैं
जब बच्चों को रोते देखती हैं माँ
मुझे नहीं पता ईश्वर कैसे होते हैं,
लेकिन मेरी माँ तेरी शक्ल जब देखता हूँ
तब लगता हैं ईश्वर ऐसे होते हैं
माँ की चरणों की वंदना
तो विधाता भी करते हैं
इसके बिना तो संसार ही सुना लगता है
माँ की आँचल में जो सुख है
वो स्वर्ग में कहाँ से मिल पाएगा?
माँ की एक आशीष हमें
दुर्गुणों से दूर कर जाएगा
माँ का प्रेम निश्छल है, कोलम है, पवित्र है
इसके कर्जो को हम चुका पाए
हम में वो सामर्थ कहाँ?
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