जय जेतवानी
माथे पर शिकंज और अजीब सी
हड़बड़ाहट में श्याम बाबू चिल्लाते हुए ड्राइवर को कहते हैं कि "जल्दी से शहर
ले चलो हमको शहर का सबसे मशहूर डॉक्टर के यहां ले चलो"
और फिर तीखी नजरों को फेर कर
किसी पर रखते हुए कहा :- "कलुआ तू और इस छोरी को गाड़ी के पीछे वाली सीट में
जल्दी तनिक जल्दी लेकर बैठ जाओ फिर हमें निकलना भी हैं"
उसके बाद कलुआ और उसकी बेटी
भी गाड़ी में बैठ गए और ड्राइवर ने बिना वक्त गवांते हुए गाड़ी चालू कर शहर
के लिए श्याम बाबू को गाड़ी में बिठा कर निकल पड़े करीबन कुछ देर बाद श्याम बाबू
कि नजर एक इमारत पर पड़ी। आलीशान सी जगह उस जगह पर अस्पताल लिखा था ,श्याम बाबू ने
ड्राइवर को रोकने का आदेश दिया ड्राइवर ने जैसे ही गाड़ी का गेट खोला और श्याम
बाबू गाड़ी से बाहर निकले और फिर कुछ देर बाद जैसे ही ड्राइवर की नजर उस इमारत पर
पड़ी तो उसका मुंह खुला का खुला ही रह गया क्योंकि पहली दफा था। जब श्याम बाबू जो
गांव के इतने बड़े जमीदार थे और उन्हें गांव के बाहर कदम उठाना पसंद नहीं था वह
पहली बार शहर आए थे। इतना कुछ दिमाग में ड्राइवर के चल रहा था तभी श्याम बाबू ने
उसको जोर से हिला कर उसकी ख्यालों की निद्रा तोड़ी। जब उसको होश आया कि वह कहां पर
खड़ा है फिर श्याम बाबू को गुस्से में देख कर उसने अपना सर झुका दिया ।श्याम बाबू
ने बिना वक्त गवांए गाड़ी का दरवाजा खोला और कलुआ की बेटी को गोदी में उठाकर
अस्पताल ले गए यह दृश्य देखने के बाद ड्राइवर की आंखें फटी की फटी रह गई और श्याम
बाबू के पीछे पीछे कलुआ भी भी उस अस्पताल की इमारत में चला गया श्याम बाबू ने
अस्पताल के अंदर घुसते ही जोर से डॉक्टर साहब डॉक्टर साहब चलाना शुरु कर दिया ।तब
वहां की नर्स ने पहले तो उनको वहीं पर रोक दिया, लेकिन फिर परिस्थिति को
समझते हुए उन्हें डॉक्टर साहब के केबिन की तरफ जाने का इशारा कर दिया। डॉ विनय उस
समय खाना ही खा रहे थे। लेकिन श्याम बाबू के केबिन के अंदर आने पर मरीज की देखरेख
करना पहले समझा इसलिए उन्होंने अपना खाने का डिब्बा बंद कर श्याम बाबू को बैठने के
लिए कह दिया । डॉक्टर विनय ने श्याम बाबू को एक नजर से देखते हुए कहां :-" जी
कहिए क्या समस्या है आपको? "
श्याम बाबू ने डॉक्टर विनय को
देखते हुए कहा :-"साहब ,यह कलुआ की छोरी ने बाहर खेलते-खेलते गलती से कुछ
निगल लिया है और वह चीज इसके गले की नली में अटक गई है तो हम चाहे कि वह चीज आप बाहर
निकाल दो .."
डॉक्टर विनय ने उस बच्ची को
ढंग से देखने के बाद कहा "ठीक है जो भी फंसा हुआ है वह निकल जाएगा खतरे की
बात नहीं है बस आप बाहर से दवाइयों की दुकान से इस पर्ची पर लिखी हुई कुछ दवाइयां
और बेहोशी का इंजेक्शन ले आए फिर एक छोटा सा ऑपरेशन होगा और उसके बाद वह चीज निकल
जाएगी"
श्याम बाबू फटाक से वह पर्ची
हाथ में लेते हुए निकल पड़े उस समय डॉक्टर विनय और कलुआ अकेले थे तो अकेलापन
मिटाने के लिए डॉ विनय ने कुछ बातें करना शुरु कर दिया डॉक्टर विनय ने कलुआ को
देखते हुए कहा :- "तुमको तो शुक्र मनाना चाहिए कि तुम्हारे गांव में कोई ऐसा
शख्स भी है, जो तुम्हारी इतनी मदद कर रहा है"
कलुआ ने डॉ विनय की बात सुनते
हुए कहा :-
"साहब यह बड़का लोग हैं
और हम ठहरे छोटी जात के, साहब हमारी बच्ची के परेशान हो रही थी लेकिन गांव में
हमको अछूत कहकर हमारी बिटवा को देखा तक नहीं वह तो हम बाबू साहब को यह बोल दिए कि
हमार बेटी हीरो की खान के यहां खेल रही थी और उसने कोई हीरा निगल लिया और बाबू
साहब यहां शहर में आए इलाज के लिए नाही ताकि उनको हीरा मिल सके उनका यह लालच है जो
उन्हें यहां ले आया है"
यह सब करने के बाद डॉक्टर बने
हैरान रह गए उन्होंने कहा:-" क्या किसी को अछूत कहकर उसे तड़पता हुआ छोड़
दिया फिर अगर श्याम बाबू को पता चलेगा कि तेरी बेटी ने हीरा नहीं कुछ और ही निगल
लिया है तो क्या होगा"
कलुआ ने भी यह बात सोच कर कहा
:-साहब उस वकत हमको हमारी बेटी का तकलीफ दिख रहा था और कुछ नहीं दिख रहा है लाचार
हो गया थे पर हम बाबू साहब का पैसा नहीं खाएंगे ,उनकी पाई-पाई चुका देंगे"
इतना कहते ही अचानक से श्याम
बाबू आए और पर्ची में लिखा हुआ हर एक दवाई और बेहोशी का इंजेक्शन भी ले आए ऑपरेशन
सही तरीके से हो गया और जब डॉक्टर विनय ऑपरेशन थिएटर से बाहर आए तो उन्होंने कहा
:-"कि ऑपरेशन सही कहा और वह चीज निकाल भी दिया है खतरे से बाहर है, लेकिन सच
में आपकी बिटिया ने कोई ऐरी गैरी चीज़ नहीं सच में यही हीरा निगल लिया था "
और यह सब बात सुनने के बाद
श्याम बाबू के चेहरे पर तो सच में मुस्कुराहट झलक रही थी और कलुआ भी खुश था कि चलो
बाबू साहब को वह हीरा दे देगा ,परंतु श्याम बाबू की निगाहें तो उस हीरे से हट ही
नहीं रही थी इतना बड़ा हीरा पहली बार देखा था उन्होंने। कलुआ ने बाहर निकलते ही वह
हीरा श्याम बाबू के हाथों में थमा दिया
श्याम बाबू ने वही हीरा कलुआ
के वापस हाथों में थमाते हुए कहा :-" पागल हम तो तोहार बिटिया के लिए आए थे
हीरा के लिए नहीं, और हम बहुत ज्यादा खुश है कि तोहार बिटिया सही है ,और हां हम
ऊंच-नीच में भरोसा रखते हैं लेकिन आज तोहार बिटिया को तकलीफ में देखने के बाद हमको
लगाके तोहार बिटिया भी हमारी बिटिया की तरह ही तो है और एक बिटिया को तकलीफ में
देखकर पिता तो बेकाबू और बेचैन हो ही जाता है इसलिए हमने तोहार बिटिया का इलाज
करवाया , चल जल्दी गाड़ी में बैठ वापस गांव भी तो निकलना है"
कलुआ श्याम बाबू को देखता ही
रह गया वह मन ही मन अपने आप को कोस रहा था कि उसने खामखा श्यामबाबू पर शक किया फिर
कलवा के मन में श्याम बाबू के लिए इज्जत और भी बढ़ गई
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