अखिलेन्द्र राज सामर्थ्यवान संपूज्य जगत मे पूज्य कहा निर्बल है वह कहलाता उतना महान जिसमे जितना बल है निर्बल की करूण वेदना सुन किसका अब खून खौलता है हर तरफ दुशासन दुर्योधन नारी का जिस्म तौलता है अब कहाँ बचा है धर्म और इमान कहाँ अब जिंदा है पावनतम् भारत भूमि पर जब जिस्म बेचना धंधा है कोई भूखा तड़प रहा है घर मे दो दो रोटी को तरस रहा है कोई बच्चा तन पर एक लंगोटी को कागज और कलम मे दिखता हो भारत कुछ और भले असली भारत आज अभी भी दबा हुआ है भूख तले कोरे कागज मे विकास के कालम बेशक पूरे है लेकिन बस ये कालम भर है आगे सभी अधूरे है मात्र कल्पना नही सत्य यह भारत की असली सूरत है महलों से यह नही दिखेगी यह जमीन की वह मूरत है चीख रही है द्रुपद सुता और भूख खा रही जान उठा लेखनी कैसे लिख दूँ भारत देश महान
अखिलेन्द्र राज आवाम की आवाज को कैसे दबाया जा रहा है चंद टुकड़ो के लिये, गुण गान गाया जा रहा है दीखनी चहिये जहा हालात हिंदुस्तान की देखिये साहब वहाँ क्या क्या दिखाया जा रहा है भुखमरी बेरोजगारी खेत मे मरता किसान छोड़िये महलों को आकर देखिये हिंदोस्तान आइये फिर देखिये हालात उस इंसान का लोग कहते है जिसे भगवान हिंदुस्तान का जो ब्यवस्था कर रहा है शहर के पकवान का सूखी रोटी से है लगता भोग उस भगवान का सेठ साहूकार की फटकार जिसकी जिंदगी है और उसका पूर्ण जीवन उन पगों की बंदगी है बेटियाँ होती जवां इसकी भी उसको फिक्र है इस खबर की सिर्फ और बस सिर्फ उसको जिक्र है इस खबर को कोई भी अखबार लायेगा नही और न ही किसी चैनल पर ये छायेगा कही क्योकि इस खबर मे कोई मसाला नही है और इस पे कोई खास टीआरपी मिलने वाला नही है इसकी खबर सिर्फ उस इंसान के दिमाग पर चलती है जिसमे हिंदुस्तान की असली तस्वीर पलती है यह एक छोटी सी खबर है जिस से टी.बी. और अखबार दोनो बेखबर है यह कोई खास खबर नही पल रही है , ऐसी बहुत सी खबरे हिंदुस्तान मे चल रही है, लेकिन उनपे कोई खास टीआरपी मिलने वाला नही है,...